ऑप्शन ट्रेडिंग कोर्स: पहले जोखिम समझें
ऑप्शंस कैसे काम करते हैं, प्रीमियम क्यों बदलता है और सीमित-जोखिम वाली संरचनाएँ कैसे बनती हैं, यह समझें। शुरुआत फ्री ओरिएंटेशन से।
- कॉल, पुट और प्रीमियम आसान भाषा में
- ग्रीक्स और टाइम-डिके
- स्प्रेड्स और रिस्क कंट्रोल
ओरिएंटेशन में आएँ
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आप क्या सीखेंगे
- F&O की संरचना: लॉट साइज़, एक्सपायरी, मार्जिन
- कॉल और पुट ऑप्शंस
- प्रीमियम, IV और ग्रीक्स
- ऑप्शन बायिंग और सेलिंग के जोखिम
- स्प्रेड्स: सीमित जोखिम वाली संरचनाएँ
- पोज़िशन साइज़ और अधिकतम नुकसान-सीमा
यह कोर्स किसके लिए है?
- इक्विटी का अनुभव रखने वाले
- F&O में नुकसान उठा चुके और कारण समझना चाहने वाले
- बेसिक कोर्स पूरा कर चुके
- हेजिंग सीखना चाहने वाले निवेशक
जोखिम सूचना: SEBI के अध्ययन के अनुसार FY22–FY24 में F&O के 93% व्यक्तिगत ट्रेडर्स को नुकसान हुआ। ऑप्शंस ट्रेडिंग में पूंजी गँवाने का बड़ा जोखिम है; यह कोर्स शिक्षा के लिए है, मुनाफ़े की गारंटी नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
WhatsApp पर पूछताछ करेंक्या नए लोग ऑप्शंस करें?
पहले बेसिक कोर्स और इक्विटी का अनुभव लेना बेहतर है। SEBI के अनुसार F&O के ज़्यादातर व्यक्तिगत ट्रेडर्स को नुकसान होता है।
क्या कोई "रिस्क-फ्री" ऑप्शन स्ट्रैटेजी है?
नहीं। हर स्ट्रैटेजी में जोखिम होता है।
क्या ओरिएंटेशन फ्री है?
हाँ। इसमें कोर्स की संरचना और फीस साफ़ बताई जाती है।